Tuesday, January 12, 2010

अधूरा मैं....










विस्तार
खोजता हूँ मैं
खुद का
आयाम
तलाशता नए
अपने
अभी भी कुछ
है मुझ में
आधा
कुछ अधुरा
क्या
सच में
??
??
हाँ
शायद
निश्चित हूँ मैं
अकेला और अधूरा

2 comments:

  1. सुन्दर कवितायें बार-बार पढने पर मजबूर कर देती हैं.
    आपकी कवितायें उन्ही सुन्दर कविताओं में हैं.

    Sanjay kumar
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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  2. aapki sarahna ki prateeksha mein sadaev... :)

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